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    August 23

    जाने कैसी स्त्री थी वह

    जाने कैसी स्त्री थी वह

    जाने कैसी स्त्री थी वह ,
    कितनी धीर ,
    कितनी सबल !

    कैसे कहा होगा उसने
    माता पिता से,
    पीहर और ससुराल से -
    - नहीं ,मुझे यह विवाह स्वीकार नहीं
    - न, मैं नहीं मानती बालपने की शादी को
    - गुडिया के खेल तक की समझ न थी मुझे
    विवाह की समझ कैसे होती
    - आपका दिया यह पति मेरा पति नहीं !

    कैसे टटोला होगा अपने आप को
    जवाब दिया होगा दुनिया को -

    - बंधन है बिना प्रेम का विवाह
    और मुझे अस्वीकार
    - कोई पुरुष दीखा ही नहीं
    प्रेम के योग्य ;
    एक परमपुरुष के सिवा
    - वह आलोकसुंदर परमपुरुष ही मेरा प्रियतम है !

    कैसे किया होगा सामना
    तन मन को बींधती ज़हरबुझी नज़रों का ,
    नकारा होगा अध्यात्म का भी आकर्षण
    तोड़कर शृंखला की कड़ियाँ सारी
    भारी -

    - स्त्री पुरुष में जो भेद करे
    वह धर्म मेरा नहीं
    - स्त्री जाति से जो भयभीत हो
    वह गुरु मेरा नहीं !

    कैसे बाँटा होगा उसने अपने अस्तित्व को
    अपने स्वयं रचे परिवार में -
    किसी विधवा नौकरानी को
    किसी सेवक को
    किसी जिज्ञासु को
    किसी गाय, किसी
    गिलहरी , किसी मोरनी को !

    उसने जीते जी मुक्ति अर्जित की
    विराटता सिरजी -
    कभी बदली
    कभी दीप
    कभी कीर बनकर.
    उसी ने दिखाया मुक्ति का मार्ग मेरी स्त्री को
    संपूर्ण आत्मदान के बहाने
    न्यस्त करके स्वयं को
    सर्वजन की आराधना में .

    वह सच ही महादेवी थी !!

    हे अग्नि!

    हे अग्नि! हे अग्नि! तुम्हें प्रणाम करते हैं हम। बहुत क्षमता है तुममें बड़ा ताप है - बड़ी जीवंतता। तुम जल में भी सुलगती हो और वायु में भी, भूगर्भ में भी तुम्हीं विराजमान हो और व्यापती हो आकाश में भी तुम। हमारे अस्तित्व में अवस्थित हो तुम प्राण बनकर। परमपावनी! तुममें अनंत संभावनाएँ हैं तुम्हीं से पवित्रता है इस जगत में। फूँकती हो तुम सारे कलुष को, शोधती हो फिर-फिर हिरण्यगर्भ ज्ञान की शिखा को। तुम ही तो जगती हो हमारे अग्निहोत्र में और आवाहन करते हैं तुम्हारा ही तो संध्या के दीप की लौ में हम। जगो, आज फिर, खांडवप्रस्थ फैला है दूर-दूर डँसता है प्रकाश की किरणों को, फैलाता है अँधेरे का जाल उगलता है भ्रम की छायाओं को। उठो, तुम्हें करना है छायाओं में छिपे सत्य का शोध। तुम चिर शोधक हो, हे अग्नि! तुम्हें प्रणाम करते हैं हम।