rishabha's profileऋषभ की कविताएँPhotosBlogListsMore ![]() | Help |
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July 30 राधा क्या चाहेराधा क्या चाहे ''राधिके!'' ''हूँ?'' ''भला क्या तो है तेरे कान्हा में?'' ''पता नहीं.'' ''पौरुष?'' ''होगा. बहुतों में होता है.'' ''सौंदर्य?'' ''होगा. पर वह भी बहुतों में है.'' ''प्रभुता?'' ''होने दो. बहुतों में रही है.'' ''फिर क्यों खिंची जाती है तू बस उसी की ओर?'' ''उसे मेरी परवाह है न!'' http://streevimarsh.blogspot.com/2009/07/blog-post_17.html July 15 अम्मा, ग़रज़ पड़ै चली आओ चूल्हे की भटियारी !
दो बेटे हैं मेरे. गबरू जवान निकले दोनों ही. वक़्त बदल गया. ज़मीन के लिए लड़े दोनों बलजोर ने बरजोरी लगवा लिया अँगूठा दोनों ने दरवाजे बंद कर लिए, जीवन भर रोटी थेपती आई. |
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